लौटेगी मस्तानीबाई के मायके में बने मस्तानी महल की रौनक


लौटेगी मस्तानीबाई के मायके में बने मस्तानी महल की रौनक

Updated: | Sat, 07 May 2016 06:40 PM (IST)

naidunia

मुरैना। पुणे के पेशवा बाजीराव प्रथम की प्रेमिका मस्तानीबाई के मायके (बुंदेलखंड) में बना मस्तानी महल फिर से अपने एतिहासिक रूप में वापस आएगा। छतरपुर से 18 किमी दूर धुबेला में बना 17वीं सदी का यह महल बुंदेला राजा छत्रसाल ने अपनी मुंह बोली बेटी मस्तानीबाई के लिए बनवाया थाl

पुरातत्व विभाग करीब 12 लाख रुपए से इस महल की मरम्मत करवाएगा। पुरातत्व अधिकारी के मुताबिक बड़े स्तर पर इस महल का यह पहला रख-रखाव कार्य होगा। इसके अलावा मुरैना के हुसैनपुर गढ़ी व महल, भिंड के इंदुरखी की बारदरी और श्योपुर के नरसिंह महल व किले की मरम्मत में भी विभाग करोड़ों रुपए का खर्चा कर रहा है।

संचालनालय पुरातत्व संग्रहालय एवं अभिलेखागार ने ग्वालियर सर्किल में आने वाले करीब 8 जिलों के 16 मॉन्यूमेंट की मरम्मत कार्य के लिए करोड़ों रुपए स्वीकृत किए हैं। मॉन्यूमेंट की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इन मॉन्यूमेंट्स में छतरपुर मस्तानी महल भी शामिल है। बहुत कम लोग जानते हैं कि मस्तानी महल पुणे में ही नहीं, बल्कि छतरपुर में भी है। दोनों ही महल 17वीं सदी में बनवाए गए थे।

इसमें से एक का निर्माण राजा छत्रसाल ने 1696 में छतरपुर के धुबेला में करवाया था। बुंदेली इतिहासकारों के मुताबिक राजा छत्रसाल मस्तानी बाई को बेटी मानते थे। इसलिए इस महल का निर्माण कराया। इसी महल से 1727(मोहम्मद बंगस के आक्रमण के समय) के आस-पास बाजीराव प्रथम और मस्तानी बाई की शादी भी हुई थी। इस लिहाज से भी यह महल ऐतिहासिक है।

दूसरा मस्तानी महल पुणे के शनिवार वाड़ा में है, जिसे खुद पेशवा बाजीराव प्रथम ने मस्तानी बाई के लिए बनवाया था। ग्वालियर सर्किल के उप संचालक पुरातत्व एसआर वर्मा की मानें तो मस्तानी के मायके यानी छतरपुर में बने इस महल का इससे पहले बड़े पैमाने पर संरक्षण नहीं हुआ था। जिसके चलते महल अपना स्वरूप खो रहा था। महल का पहली बार पूरी तरह से जीर्णोद्धार करवाया जा रहा है।

चंबल संभाग में तीन मान्यूमेंट्स की होगी मरम्मत

चंबल संभाग के भिंड जिले में प्राचीन इंदुरखी गढ़ी में बने मंदिर की बारहदरी का भी जीर्णोद्धार पुरातत्व विभाग करवा रहा है। इस काम में पुरातत्व विभाग करीब 12 लाख रुपए खर्च करेगा। इधर मुरैना के हुसैनपुरा में बने 16वीं से 17वीं सदी के महल, दरवाजे और किले का भी जीर्णोद्धार करीब 11 लाख 50 हजार रुपए होगा। चंबल संभाग में मुरैना के सबलगढ़ किले का काम करीब 1 करोड़ की राशि से चल रहा है। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ी लागत का काम श्योपुर के नरसिंह महल व किले में शुरू होगा। इसके लिए करीब 88 लाख रुपए सरकार ने स्वीकृत किए हैं।

इन जिलों में यह काम होने हैं

पुरातत्व विभाग छतरपुर की देवरी गढ़ी का जीर्णोद्धार 22 लाख रुपए से, किशनगढ़ के किले का जीर्णोद्धार करीब 19 लाख रुपए से करवाएगा। सागर के सनोधा के किले का काम 50 लाख रुपए होगा। पन्ना में मिजा के मकबरे को 24 लाख से संरक्षित किया जाएगा। इधर टीकमगढ़ के गढ़कुंडार के किले का काम 94 लाख से और ओरछा के राय प्रवीण महल के आगे फैंसिंग का काम 16 लाख से होगा।

पन्ना में मिर्जा का मकबरा का संरक्षण 24 लाख रुपए होगा। इधर अशोकनगर में चंदेरी स्थित सूफी का मकबरा 13 लाख से, आलिया मस्जिद व बावड़ी 15 लाख से, मदरसा दरवाजा 14 लाख से, खिलजी का सराय 20 लाख से, जागेश्वरी मंदिर व छतरी 32 लाख से, अशोक नगर का छोलिया दरवाजा 22 लाख से संरक्षित होगा।


मस्तानी बाई के धुबेला स्थित महल का पहली बार जीर्णोद्धार करवाया जा रहा है। इसके अलावा 8 जिलों में कुल 16 मॉन्यूमेंट के संरक्षण का काम भी हो रहा है। इनमें से 8 मान्यूमेंट ऐसे हैं जिन पर 20 लाख से कम खर्च होना है। बाकी के 8 पर 20 लाख से ज्यादा और 1 करोड़ से कम का खर्चा होना है।

एसआर वर्मा, डिप्टी डायरेक्टर पुरात्व संग्रहालय एवं अभिलेखागार ग्वालियर


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