इन मणियों के विविध चमत्कारों को जानकर हो जाएंगे अभीभूत
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इन मणियों के विविध चमत्कारों को जानकर हो जाएंगे अभीभूत
वेद, रामायण, महाभारत और पुराणों में…
मणियों के चमत्कार से हम सब अचम्भे रह जाएंगे। वेद, रामायण, महाभारत और पुराणों में कई तरह की चमत्कारिक मणियों का जिक्र मिलता है।
फिल्मों में मणि
पौराणिक कथाओं में सर्प के सिर पर मणि के होने का उल्लेख मिलता है। इसे कई फिल्मों में भी फिल्माया गया है।
पाताल लोक और मणि
पाताल लोक मणियों की आभा से हर समय प्रकाशित रहता है। सभी तरह की मणियों पर सर्पराज वासुकि का अधिकार है।
क्या होती है मणि?
वस्तुतः मणि एक प्रकार का चमकता हुआ पत्थर होता है। मणि को हीरे की श्रेणी में रखा जा सकता है।
मणि और हम
मणि वास्तव में क्या होती थी यह भी अपने आप में एक रहस्य है। जिसके भी पास मणि होती थी, वह कुछ भी कर सकता था।
अश्वत्थामा और मणि
जैसा कि हम जानते हैं कि अश्वत्थामा के पास मणि थी जिसके बल पर वह शक्तिशाली और अमर हो गया था। रावण ने कुबेर से चंद्रकांत नाम की मणि छीन ली थी।
कौन-कौन-सी मणियां?
मान्यता है कि मणियां कई प्रकार की होती थीं। आगे जानिए कि कौन-कौन-सी मणियां होती हैं तथा इनका प्रकोप कितना और किस हद तक होता है।
मणिपुर के पीछे मणि
मणियों के महत्व के कारण ही तो भारत के एक राज्य का नाम मणिपुर है। शरीर में स्थित सात चक्रों में से एक मणिपुर चक्र भी होता है।
मणि, कहानी और कथाएं
मणि से संबंधित कई कहानी और कथाएं समाज में प्रचलित हैं। इसके अलावा पौराणिक ग्रंथों में भी मणि के किस्से भरे पड़े हैं। इनमें से कुछ काफी रोचक हैं।
जैन धर्म और मणि
मणियों को सामान्य हीरे से कहीं ज्यादा मूल्यवान माना जाता है। जैनियों में मणिभद्र नाम से एक महापुरुष हुए हैं।
मणि एवं भगवान
ऐसा माना जाता है कि चिंतामणि को स्वयं ब्रह्माजी धारण करते हैं। रुद्रमणि को भगवान शंकर धारण करते हैं। कौस्तुभ मणि को भगवान विष्णु धारण करते हैं।
मणियां
इसी तरह और भी कई मणियां हैं, जिनके चमत्कारों का उल्लेख पुराणों में है। आइए जानते हैं कुछ महत्वपूर्ण मणियों के बारे में:
पारस मणि
पारस मणि का जिक्र पौराणिक और लोक कथाओं में खूब मिलता है। इसके हजारों किस्से और कहानियां समाज में प्रचलित हैं। कई लोग यह दावा भी करते हैं कि उन्होंने पारस मणि देखी है।
कुएं में पारस मणि
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में जहां हीरे की खदान है, वहां से 70 किलोमीटर दूर दनवारा गांव के एक कुएं में रात को रोशनी दिखाई देती है। लोगों का मानना है कि कुएं में पारस मणि है।
भारत में कई ऐसे स्थान हैं
पारस मणि की प्रसिद्धि और लोगों में इसके होने को लेकर इतना विश्वास है कि भारत में कई ऐसे स्थान हैं, जो पारस के नाम से जाने जाते हैं। कुछ लोगों के आज भी पारस नाम होते हैं।
पारस मणि की खासियत
पारस मणि से लोहे की किसी भी चीज को छुआ देने से वह सोने की बन जाती है। इससे लोहा भी काटाजा सकता है।
कौए पहचानते हैं पारस मणि
कहते हैं कि कौवों को इसकी पहचान होती है और यह हिमालय के आसपास ही पाई जाती है। कई लोग इस तर्क को गलत मानते हैं।
साधु-संत और पारस मणि
हिमालय के साधु-संत ही जानते हैं कि पारस मणि को कैसे ढूंढ़ा जाए, क्योंकि वे यह जानते हैं कि कैसे कौवे को ढूंढ़ने के लिए मजबूर किया जाए।
नीलमणि
नीलमणि एक रहस्यमय मणि है। असली नीलमणि जिसके भी पास होती है उसे जीवन में भूमि, भवन, वाहन और राजपद का सुख होता है। इसे 'नीलम' भी कहा जाता है। लेकिन शनि के रत्न नीलम और नीलमणि में फर्क है। संस्कृत में नीलम को इन्द्रनील, तृषाग्रही नीलमणि भी कहा जाता है।
सबसे बड़ा नीलम
असली नीलमणि या नीलम से नीली या बैंगनी रोशनी निकली है, जो दूर तक फैल जाती है। विश्व का सबसे बड़ा नीलम 888 कैरेट का श्रीलंका में है जिसकी कीमत करीब 14 करोड़ आंकी गई है। भारत में नीलमणि पर्वत भी है। भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य में नीलम पाया जाता है।
पशुपतिनाथ मंदिर में असली 'नीलमणि'
कश्मीर में पहले नागवंशियों का राज था। नीलम का विशुद्ध रंग मोर की गर्दन के रंग का होता है। कहते हैं कि नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में असली 'नीलमणि' रखी हुई है। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है कि नीलम का लाभ होता है या नहीं, यह दावे से नहीं कहा जा सकता।
नागमणि
नागमणि को भगवान शेषनाग धारण करते हैं। भारतीय पौराणिक और लोक कथाओं में नागमणि के किस्से आम लोगों के बीच प्रचलित हैं। नागमणि सिर्फ नागों के पास ही होती है। नाग इसे अपने पास इसलिए रखते हैं ताकि उसकी रोशनी के आसपास इकट्ठे हो गए कीड़े-मकोड़ों को वह खाते रहें।
नागमणि के चमत्कार
नागमणि के बारे में कहा जाता है कि यह जिसके भी पास होती है उसकी किस्मत बदल जाती है। कहते हैं कि नागमणि में अलौकिक शक्तियां होती हैं। उसकी चमक के आगे हीरा भी फीका पड़ जाता है।
अलौकिक शक्तियां?
मान्यता अनुसार नागमणि जिसके भी पास होती है उसमें भी अलौकिक शक्तियां आ जाती हैं और वह आदमी भी दौलतमंद हो जाता है। मणि का होना उसी तरह है जिस तरह की अलादीन के चिराग का होना। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है, यह कोई नहीं जानता।
कौस्तुभ मणि
कौस्तुभ मणि को भगवान विष्णु धारण करते हैं। कौस्तुभ मणि की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। पुराणों के अनुसार यह मणि समुद्र मंथन के समय प्राप्त 14 मूल्यवान रत्नों में से एक थी।
कांतिमान मणि?
यह बहुत ही कांतिमान मणि है। यह मणि जहां भी होती है, वहां किसी भी प्रकार की दैवीय आपदा नहीं होती। यह मणि हर तरह के संकटों से रक्षा करती है। माना जाता है कि समुद्र के तल या पाताल में आज भी यह मणि पाई जाती है।
चंद्रकांता मणि
भारत में चंद्रकांता मणि के नाम पर अब उसका उपरत्न ही मिलता है। इस मणि को धारण करने से भाग्य में वृद्धि होती है। किसी भी प्रकार की गंभीर दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। इससे वैवाहिक जीवन भी सुखमय व्यतीत होता है।
स्यमंतक मणि
स्यमंतक मणि को इंद्रदेव धारण करते हैं। कहते हैं कि प्राचीनकाल में कोहिनूर को ही स्यमंतक मणि कहा जाता था। कई स्रोतों के अनुसार कोहिनूर हीरा लगभग 5,000 वर्ष पहले मिला था और यह प्राचीन संस्कृत इतिहास में लिखे अनुसार स्यमंतक मणि नाम से प्रसिद्ध रहा था।
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