तो क्या यहां है पारस मणि


तो क्या यहां है पारस मणि

Updated: | Fri, 11 Nov 2016 12:38 PM (IST)

नाग देवता से जुड़ी पौराणिक कहानियों में सांप के सिर पर मणि होने के उल्लेख मिलता है। यह मणि एक चमकता पत्थर होती है। जिसकी तुलना हीरे से की जाती है। लेकिन पौराणिक कहानियों में जरूर इसका उल्लेख हो, लेकिन आधुनिक जीव वैज्ञानिकों की मानें तो ऐसा कुछ भी नहीं होता।


त्रेतायुग की बात की जाए तो रावण ने कुबेर से चंद्रकांत नाम की मणि छीनी थी। वहीं द्वापरयुग में अश्वत्थामा के पास भी मणि थी, जिसके कारण वह शक्तिशाली था। इन दोनों ही बातों का उल्लेख धर्म ग्रंथों में विस्तार से उल्लेखित है। त्रिदेव भी मणि को धारण करते हैं। चिंतामणि को स्वयं ब्रह्माजी धारण करते हैं। कौस्तुभ मणि को भगवान विष्णु धारण करते हैं। रुद्रमणि को भगवान शंकर धारण करते हैं।

तरह तरह की मणि

पारस मणि का उल्लेख लोक कथाओं में मिलता है। कहते हैं मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में जहां हीरे की खदान है, वहां से 70 किलोमीटर दूर दनवारा गांव के एक कुएं में रात को रोशनी दिखाई देती है। लोगों का मानना है कि कुएं में पारस मणि है। पारस मणि से लोहे की किसी भी चीज को स्पर्श कराने पर वह सोने की बन जाती थी।


नागमणि को भगवान शेषनाग धारण करते हैं। नागमणि सिर्फ नागों के पास ही होती है। नाग इसे अपने पास इसलिए रखते हैं ताकि उसकी रोशनी के आसपास इकट्ठे हो गए कीड़े-मकोड़ों को वह खाता रहे। छत्तीसगढ़ी साहित्य और लोककथाओं में नाग, नागमणि और नागकन्या की कथाएं मिलती हैं। नागमणि के बारे में कहा जाता है कि यह जिसके भी पास होती है उसकी किस्मत बदल जाती है।

कौस्तुभ मणि को भगवान विष्णु धारण करते हैं। कौस्तुभ मणि की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। पुराणों के अनुसार यह मणि समुद्र मंथन के समय प्राप्त 14 मूल्यवान रत्नों में से एक थी। यह बहुत ही कांतिमान मणि है।

यह मणि जहां भी होती है, वहां किसी भी प्रकार की दैवीय आपदा नहीं होती। यह मणि हर तरह के संकटों से रक्षा करती है। माना जाता है कि समुद्र के तल या पाताल में आज भी यह मणि पाई जाती है।

सुश्रुत संहिता में चन्द्र किरणों का उपचार के रूप में उल्लेख मिलता है जिनमें प्रमुख है अद्भुत चंद्रकांत मणि का उल्लेख। इस मणि की एक प्रमुख विशेषता होती है कि इसे चन्द्र किरणों की उपस्थति में रखने पर इससे जल टपकने लगता है। स्यमंतक मणि को इंद्रदेव धारण करते हैं। कहते हैं कि प्राचीनकाल में कोहिनूर को ही स्यमंतक मणि कहा जाता था।


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