महाभारत युद्ध के 18 अंक का गुप्त रहस्य
- Get link
- X
- Other Apps
अस्तोमा सद्ग्मया| तमसोमा ज्योतिरग्मया| मृत्योर्मा अम्रुतान्गमया| ॐ शांति शांति शांतिही ||
शनिवार, 5 अप्रैल 2014
महाभारत युद्ध के 10 गुप्त रहस्य (Ten Secrets of Mahabhatara)
यह ग्रंथ हमारे देश के मन-प्राण में बसा हुआ है। यह भारत की राष्ट्रीय गाथा है। इस ग्रंथ में तत्कालीन भारत (आर्यावर्त) का समग्र इतिहास वर्णित है।
अपने आदर्श स्त्री-पुरुषों के चरित्रों से हमारे देश के जन-जीवन को यह प्रभावित करता रहा है।
इसमें सैकड़ों पात्रों, स्थानों, घटनाओं तथा विचित्रताओं व विडंबनाओं का वर्णन है। प्रत्येक हिंदू के घर में महाभारत होना चाहिए।
2-महाभारत में कई घटना, संबंध और ज्ञान-विज्ञान के रहस्य छिपे हुए हैं।
महाभारत का हर पात्र जीवंत है, चाहे वह कौरव, पांडव, कर्ण और कृष्ण हो या धृष्टद्युम्न, शल्य, शिखंडी और कृपाचार्य हो।
महाभारत सिर्फ योद्धाओं की गाथाओं तक सीमित नहीं है। महाभारत से जुड़े शाप, वचन और आशीर्वाद में भी रहस्य छिपे हैं।
3-दरअसल, महाभारत की कहानी युद्ध के बाद समाप्त नहीं होती है। असल में महाभारत की कहानी तो युद्ध के बाद शुरू होती है।
आज तक अश्वत्थामा क्यों जीवित है?
क्यों यदुवंशियों के नाश का शाप दिया गया था और
क्यों धर्म चल पड़ा था कलियुग की राह पर।
महाभारत का रहस्य अभी सुलझना बाकी है। महाभारत युद्ध और उससे जुड़े दस रहस्यों का हमने पता लगाया और जिसे आप शायद ही जानते हों..
4-यह सभी जानते हैं कि महाभारत का
युद्ध कुल 18 दिनों तक चला था। इस दौरान भगवान
कृष्ण ने 18 दिन तक अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था।
इसी कारण
इसी कारण
श्रीमद्भगवत गीता में कुल 18 अध्याय हैं-
अर्जुनविषादयोग, सांख्ययोग, कर्मयोग, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग, कर्मसंन्यासयोग, आत्मसंयमयोग, ज्ञानविज्ञानयोग, अक्षरब्रह्मयोग, राजविद्याराजगुह्ययोग, विभूतियोग, विश्वरूपदर्शनयोग, भक्तियोग, क्षेत्र, क्षेत्रज्ञविभागयोग, गुणत्रयविभागयोग, पुरुषोत्तमयोग, दैवासुरसम्पद्विभागयोग, श्रद्धात्रयविभागयोग और मोक्षसंन्यासयोग।
5-मालूम हो कि गीता महाभारत ग्रंथ का एक हिस्सा है।
6- ऋषि वेदव्यास ने महाभारत ग्रंथ की रचना की जिसमें कुल 18 पर्व हैं-
आदि पर्व,
सभा पर्व,
वन पर्व,
विराट पर्व,
उद्योग पर्व,
भीष्म पर्व,
द्रोण पर्व,
अश्वमेधिक पर्व,
महाप्रस्थानिक पर्व,
सौप्तिक पर्व,
स्त्री पर्व,
शांति पर्व,
अनुशासन पर्व,
मौसल पर्व,
कर्ण पर्व,
शल्य पर्व,
स्वर्गारोहण पर्व तथा
आश्रम्वासिक पर्व।
7- मालूम हो कि ऋषि वेदव्यास ने 18 पुराण भी रचे हैं।..
8-कौरवों और पांडवों की सेना भी कुल 18 अक्षोहिनी सेना थी
जिनमें कौरवों की 11 और पांडवों की 7 अक्षोहिनी सेना थी।
9- इस युद्ध के प्रमुख सूत्रधार भी 18 थे जिनके नाम इस प्रकार हैं-
धृतराष्ट्र,
दुर्योधन,
दुशासन,
कर्ण,
शकुनि,
भीष्म,
द्रोण,
कृपाचार्य,
अश्वस्थामा,
कृतवर्मा,
श्रीकृष्ण,
युधिष्ठिर,
भीम,
अर्जुन,
नकुल,
सहदेव,
द्रौपदी एवं
विदुर।
10- 18 की संख्या का अंतिम आश्चर्य यह है कि महाभारत के युद्ध के पश्चात कौरवों की तरफ से 3 और पांडवों के तरफ से 15 यानी कुल 18 योद्धा ही जीवित बचे थे। सवाल यह उठता है कि सब कुछ 18 की संख्या में ही क्यों होता गया? क्या यह संयोग है या इसमें कोई रहस्य छिपा है?
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment