आज देवशयनी एकादशी, भगवान के सोने से पहले कर लीजिए यह काम



होम  धर्म-कर्म  व्रत त्योहार  devshayani ekadashi puja vidhi devshaynai ekadashi mantra devshayan vidhi

Devsayani Ekadashi Vrat Today आज देवशयनी एकादशी, भगवान के सोने से पहले कर लीजिए यह काम

 

देवशयनी एकादशी आज पूरे देश में श्रद्धा भाव से मनाया जा रहा है। आज से यानी आषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान विष्णु 4 महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे और 4 महीने बाद देव प्रबोधनी के दिन यानी कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन भगवान योगनिद्रा से जगेंगे और फिर से सृष्टि के संचालन का कार्य भार संभालेंगे।

पद्म पुराण में देवशयनी एकादशी के विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की श्रद्धा भाव से जो पूजा करके भगवान को सुलाते हैं और फिर देव प्रबोधनी के दिन व्रत रखकर भगवान को योगनिद्र से उठाते हैं भगवान विष्णु की उन पर परम अनुकंपा होती है और व्यक्ति संसार का सुख भोगकर मोक्ष को प्राप्त कर लेता है।


भगवान विष्णु की परम कृपा के लिए आप देवशयनी के दिन किस तरह से व्रत करें और भगवान विष्णु को कैसे प्रसन्न करें इसका इंतजाम आप भगवान के सोने से पहले ही कर लें। देवशयनी एकादशी याी आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु सोते हैं इसलिए इसदिन सुबह स्नान पूजन करके दिन भर व्रत रखें। रात में भगवान विष्णु शयन में चले जाएंगे इसलिए दिन में भगवान विष्णु के शयन की पूरी व्यवस्था कर लें।

चतुर्मास 20 जुलाई से, इन चार महीनों में लाभ के लिए आजमाएं ये उपाय

देवशयनी एकादशी पूजा विधि, भगवान को सुलाने की विधि

  • भगवान विष्णु के लिए पलंग या संपुट की व्यवस्था कर लें।
  • पलंग या संपुट पर नरम बिस्तर बिछाएं।
  • भगवान विष्णु के चादर और तकिया की व्यवस्था कर लें।
    रात में भगवान विष्णु की पूजा आरती करें।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति को जयकारे के साथ बिस्तर पर लिटा दें।
    भगवान के ऊपर चादर डाल दें।
  • इसके बाद फलाहार करें।
  • इसी अवस्था में अगले चार महीने तक भगवान को सोने दें।
  • चार महीने प्रतीकात्मक रूप से मंत्रों द्वारा भगवान को स्नान कराएं और पूजन करें।
  • द्वादशी के दिन भगवान का पूजन करके ब्राह्मण भोजन करवाएं और फिर अन्न जल ग्रहण करें।

देवशयनी एकादशी, भगवान को सुलाने का मंत्र Devshayani Mantra

‘सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्। 
विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्।।



Comments

Popular posts from this blog

पुराणकथा

MAHMUD GAWAN, 1411-1481 A.D.

आद्यसमाजक्रांतिकारक श्रीगोविंदप्रभू यांचे विषयी माहिती आहे काय?